Tuesday, October 19, 2021
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सड़क के किनारे बैठकर सब्जी बेचने लगे आईएएस अधिकारी, फोटो वायरल होने के बाद दी सफाई !

जरा सोचिए कि कभी आपको पता चले कि आप सड़क किनारे जिस शख्‍स से सब्‍जी खरीद हैं वो भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) का अधिकारी है तो आप कैसा महसूस करेंगे। क्‍या कभी किसी ने इसकी कल्‍पना की होगी कि कोई आईएएस कभी सड़क पर सब्‍जी बेचते मिलेगा लेकिन यूपी के एक आईएएस की ऐसी ही तस्‍वीरें इस वक्‍त सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं। इन तस्‍वीरों में आईएएस सब्‍जी बेचते हुए नज़र आ रहे हैं। लोग तस्‍वीरों में सब्‍जी बेचते दिख रहे इस अधिकारी के बारे में जानकर चौंक जा रहे हैं।

तस्वीरों में दिख रहा है कि दुकान पर टमाटर, तरोई, बैगन, लौकी, धनिया और मिर्ची सहित कई सब्जियां रखी हुई हैं। एक तस्‍वीर में वह कोई सब्‍जी उठाकर ग्राहक को देते हुए नज़र आ रहे हैं। एक तस्‍वीर में थोड़ी दूरी पर रखा उनका जूता भी नज़र आ रहा है। ये तस्‍वीरें उन्‍होंने खुद फेसबुक पोस्‍ट पर साझा कीं तो देखते ही देखते इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। इन पर खूब लाइक और कमेंट्स मिलने लगे। तस्‍वीरें सोशल मीडिया में वायरल होने के कुछ समय बाद उन्‍होंने इन्हें अपनी फेसबुक पोस्‍ट से डिलीट कर दिया। हालांकि तब तक ये तस्‍वीरें काफी लोगों तक पहुंच चुकी थीं।

वायरल हो रहीं तस्‍वीरें, लोगों का ज्‍यादा ध्‍यान खींचने लगीं तो इन पर आईएएस अखिलेश मिश्र की सफाई भी सामने आई। उन्‍होंने कहा कि वह किसी सरकारी काम से प्रयागराज गए थे। वापस आते समय एक स्थान पर सब्ज़ी देखने के लिए रुक गए। वहां सब्ज़ी विक्रेता एक वृद्ध महिला थीं जिन्‍होंने उनसे अनुरोध किया कि मैं उसकी सब्ज़ी पर नज़र रखूं। उनका बच्‍चा थोड़ी दूर चला गया था। उन्‍होंने कहा कि एक पल में आती हूं। मैं यूं ही उसकी दुकान पर बैठ गया। इस बीच कई ग्राहक और वो सब्ज़ी विक्रेता महिला आ गईं। उन्‍होंने बताया कि जब यह सब हो रहा था उसी दौरान उनके एक परम मित्र ने फ़ोटो खींच ली। मज़ाक़ में उनके ही फ़ोन से फ़ेसबुक पोस्ट बना दी और रात में पोस्ट कर दी। जब उन्‍होंने आज इस पोस्‍ट को खुद देखा तो उसे फौरन ही हटा दिया।

सक्रिय अधिकारी की है छवि
वैसे आईएएस अखिलेश मिश्रा की छवि उत्‍तर प्रदेश की ब्‍यूरोक्रेसी में एक सक्रिय अधिकारी की है। कहा जाता है कि वह आम लोगों से जुड़ने और समस्‍याओं का समाधान करने को लेकर काफी सक्रिय रहते हैं। साहित्यिक और समसामयिक परिचर्चाओं में भी शामिल होते रहते हैं।

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